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सरकारी या बड़े प्राइवेट काम के टेंडर में कॉन्ट्रैक्टर से गारंटी माँगी जाती है — टेंडर भरते समय (EMD/बिड सिक्योरिटी) और काम मिलने के बाद (परफॉर्मेंस सिक्योरिटी)। अब तक ज़्यादातर यह बैंक गारंटी से दी जाती थी, जिसमें अक्सर FD या मार्जिन फँस जाता है।
श्योरिटी बॉन्ड क्या है?
यह बीमा कंपनी द्वारा दी गई एक गारंटी है कि कॉन्ट्रैक्टर (प्रिंसिपल) अपना वादा पूरा करेगा। अगर वह नहीं करता, तो बीमा कंपनी (श्योरिटी) विभाग/मालिक (ऑब्लिजी) को शर्तों के अनुसार भुगतान करती है — और फिर वह राशि कॉन्ट्रैक्टर से वसूल सकती है। इसलिए यह आपकी अपनी सुरक्षा वाला बीमा नहीं, बल्कि भरोसे की गारंटी है।
नियम क्या कहते हैं?
- IRDAI ने 2022 में सामान्य बीमा कंपनियों के लिए श्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट इंश्योरेंस की गाइडलाइंस जारी कीं (बाद में इनमें बदलाव भी हुए हैं)।
- वित्त मंत्रालय ने 2022 में केंद्र सरकार की खरीद में बिड और परफॉर्मेंस सिक्योरिटी के रूप में इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड को मान्य किया।
- राज्य सरकारों के विभाग (जैसे MP या राजस्थान PWD) और PSU अपने नियम खुद तय करते हैं — इसलिए टेंडर डॉक्यूमेंट में स्वीकार्य सिक्योरिटी की सूची ज़रूर देखें।
मुख्य प्रकार
- बिड बॉन्ड — टेंडर भरते समय
- परफॉर्मेंस बॉन्ड — काम पूरा करने की गारंटी
- एडवांस पेमेंट बॉन्ड — एडवांस राशि की गारंटी
- रिटेंशन मनी बॉन्ड — रोकी गई राशि जल्दी छुड़वाने के लिए (जहाँ लागू हो)
बीमा कंपनी क्या देखती है?
बैलेंस शीट, नेटवर्थ, पिछले पूरे किए गए काम, मौजूदा प्रोजेक्ट और क्रेडिट हिस्ट्री। बॉन्ड जारी करना पूरी तरह बीमा कंपनी के अंडरराइटिंग फैसले पर निर्भर है।
लेखक: मोहित गिरि गोस्वामीAuthor: Mohit Giri Goswami · [प्रकाशन तिथि]